बजट प्रावधानों के अनुसार, शराब पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) की दर को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही आयातित शराब पर कस्टम ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले एक्साइज ड्यूटी में भी बढ़ोतरी के संकेत दिए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पिरिट्स और वाइन्स पर एक्साइज ड्यूटी 60 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में देसी और विदेशी, दोनों तरह की शराब की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि इन कर बदलावों के चलते रिटेल स्तर पर शराब की कीमतें 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। खासतौर पर प्रीमियम और इंटरनेशनल ब्रांड्स पर इसका असर ज्यादा देखने को मिलेगा। महानगरों में स्थित बार, पब और प्रीमियम लिकर शॉप्स में कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। वहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी स्थानीय और मिड-रेंज ब्रांड्स महंगे होने की आशंका जताई जा रही है।
बजट 2026-27 का असर: शौकीनों को बड़ा झटका, और महंगी होगी शराब
Telangana High Court Stays Special Privilege Fee on Bars and Restaurants for Four Weeks
Social Media Influences Bar Visits and Drink Choices in India, NielsenIQ Report Findsकेंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए शराब पीने वालों को बड़ा झटका दिया है। बजट में ‘सिन गुड्स’ यानी शराब, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया गया है। इस फैसले का सीधा असर शराब की कीमतों पर पड़ेगा और आने वाले महीनों में यह आम उपभोक्ताओं के लिए और महंगी हो सकती है।
सरकार का कहना है कि ‘सिन गुड्स’ पर टैक्स बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अत्यधिक सेवन को हतोत्साहित करना है। सरकार को उम्मीद है कि इन उत्पादों पर सख्ती से स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम कम होंगे और अतिरिक्त टैक्स से प्राप्त राजस्व को स्वास्थ्य सेवाओं, विकास कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में लगाया जाएगा। हालांकि, शराब पर राज्य सरकारों का भी अहम नियंत्रण होता है, इसलिए अंतिम कीमतें राज्यों की एक्साइज नीतियों पर निर्भर करेंगी।

