कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहॉलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) के महानिदेशक अनंत एस. अय्यर ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की 2026–27 आबकारी नीति और 2026–29 निर्यात आबकारी नीति राज्य के शराब नियमन, राजस्व वृद्धि और उद्योग विकास के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव दर्शाती है।
उनके अनुसार, यह नीति बाजार विस्तार, उपभोक्ता उपलब्धता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए कई सुधारात्मक कदम लाती है। राज्य ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ₹60,000 करोड़ का महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य रखा है, जो यह दर्शाता है कि सरकार आबकारी संग्रह बढ़ाने के साथ-साथ उद्योग वृद्धि को भी प्राथमिकता दे रही है।
प्रीमियम व्हिस्की ब्रांड्स को बढ़ावा
नीति में प्रीमियम रिटेल आउटलेट्स पर प्रीमियम और उससे ऊपर श्रेणी की भारतीय व्हिस्की की बिक्री को अलग श्रेणी में अनुमति दी गई है। इससे घरेलू प्रीमियम और लक्ज़री व्हिस्की ब्रांड्स को बड़े स्टोर्स में अधिक स्थान मिलेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।
Scotch Whisky Association Appeals Against England’s New Single Malt Whisky Rules
Kerala Government Plans Strict Action Against Bars Serving Alcohol to People Below 23निर्यात नीति से निवेश को प्रोत्साहन
CIABC ने विशेष निर्यात आबकारी नीति को उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग बताया है। इससे निर्यात-उन्मुख उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कंपनियां नई इकाइयाँ स्थापित करने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगी।
इससे रोजगार और राज्य के राजस्व दोनों में वृद्धि की संभावना है। तीन वर्षीय नीति निवेशकों के लिए स्थिरता और भरोसे का संकेत भी देती है।
रिव्यू मैकेनिज्म से निवेशकों का भरोसा
नीति में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समीक्षा समिति का प्रावधान किया गया है, जो लागू होने के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाएगी। उद्योग के अनुसार, इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
हालांकि, CIABC के मुताबिक विशेष कंसिडरेशन फीस में बढ़ोतरी के कारण IMFL उत्पादों की कीमत ₹10 से ₹180 तक बढ़ सकती है। इससे उपभोक्ता सस्ते विकल्पों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे बिक्री और राजस्व दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
छोटे पैक साइज पर असमान नीति
नीति में UPML के लिए 100 ml टेट्रा पैक की अनुमति दी गई है, जिसकी कीमत लगभग ₹50 होगी। लेकिन IMFL कंपनियों को 90 ml पैक बेचने की अनुमति नहीं दी गई है।
उद्योग का कहना है कि इससे इकॉनमी और मिड-सेगमेंट ब्रांड्स को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान होगा।
निष्कर्ष
CIABC का मानना है कि उत्तर प्रदेश की नई आबकारी और निर्यात नीति उद्योग विस्तार, निवेश और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, कुछ प्रावधानों में सुधार की आवश्यकता है, ताकि सभी श्रेणियों के निर्माताओं को समान अवसर मिल सके और बाजार संतुलित रूप से विकसित हो सके।

