झारखंड में हड़िया बहुत फेमस ड्रिंक है। आदिवासी व्यंजन बनाने में एक्सपर्ट शालिनी बताती हैं कि हड़िया को चावल और एक जड़ी बूटी से तैयार किया जाता है, जिसका नाम है रानू। इसे जंगली जड़ी चैली कंदा की जड़ से निकाला जाता है। इसके बाद इसे अरवा चावल में कूटकर मिलाया जाता है और उसकी गोलियां तैयार की जाती हैं। सबसे पहले चावल को पकाया जाता है और पकने के बाद उसे ठंडा कर लेना होता है। फिर चावल में तैयार की गई रानू की गोलियां मिलाई जाती हैं। इसके बाद इसे सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। बाजारों में यह खूब बिकती है और आदिवासियों द्वारा खूब पसंद की जाती है। साथ ही रांची के लोकल लोग भी इसे बड़े चाव से पीते हैं। क्योंकि यह प्रोटीन फाइबर और कॉलेजन का काफी अच्छा सोर्स माना जाता है। रांची के आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे बताते हैं कि आजकल लोग हड़िया में नशीले पदार्थ मिलाकर नशे के रूप में सेवन करते हैं। लेकिन अगर आप इसे ओरिजिनल फॉर्म में पीते हैं, तो यह sकाफी फायदेमंद है।
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