वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की स्थिति
विश्व की जनसंख्या लगभग 8 अरब है, जिसमें करीब 2.3 अरब लोग किसी न किसी रूप में शराब का सेवन करते हैं। वैश्विक स्तर पर प्रति व्यक्ति शुद्ध अल्कोहल की वार्षिक खपत लगभग 5.5 लीटर है, जबकि भारत में यह लगभग 4.9 लीटर है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह बढ़कर 6.7 लीटर हो सकती है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि शराब पीने वालों का प्रतिशत धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन जो लोग पीते हैं, वे पहले की तुलना में अधिक मात्रा में सेवन कर रहे हैं। भारत विश्व में व्हिस्की का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में प्रति व्यक्ति खपत 9.2 लीटर है, जबकि अमेरिका में यह 7.5 लीटर है। एशिया में खपत इससे कम है और उत्तर अफ्रीका तथा मध्य पूर्व में यह सबसे कम है।
मुक्त व्यापार समझौते और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
भारत के तेजी से बढ़ते बाजार को देखते हुए कई देश—जैसे यूके, ऑस्ट्रेलिया, जापान और सिंगापुर—भारतीय शराब बाजार में प्रवेश करने के इच्छुक हैं।
भारत में शराब उद्योग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कंपनियां यहां निवेश कर सकती हैं। यूके और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के अनुसार, शराब पर आयात शुल्क को मौजूदा 150 प्रतिशत से घटाकर पहले चरण में 75 प्रतिशत और अगले 10 वर्षों में 40 प्रतिशत तक किया जाएगा।
इससे विदेशी ब्रांड्स की कीमतें कम होंगी और घरेलू कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके अलावा, मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (MIP) और स्पिरिट्स के परिपक्वता (maturation) नियम जैसे गैर-टैरिफ अवरोध भी भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।

खपत पैटर्न और बाजार संरचना
वर्ष 2023–24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल शराब खपत लगभग 1,078 मिलियन केस रही। इसमें बीयर, देशी शराब और IMFL का बड़ा योगदान है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 173 मिलियन केस की खपत दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय खपत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

