आबकारी टाइम्स । मार्च-2026
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने 17वें बजट में राज्य की एक्साइज व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। सरकार अप्रैल 2026 से नया एक्साइज बिल लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें पुरानी टैक्स प्रणाली की जगह अल्कोहल-इन-बेवरेज (AIB) आधारित टैक्सेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नए सिस्टम में टैक्स शराब में मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर लगाया जाएगा, जो वैश्विक स्तर पर अपनाया जाने वाला तरीका माना जाता है।
इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में कई शराब कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
नई एक्साइज नीति में क्या होगा बदलाव
बजट में किए गए एक्साइज सुधारों के तहत अब राज्य सरकार शराब की कीमतें सीधे तय नहीं करेगी। यानी कीमतों को लेकर डिरेगुलेशन लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था में टैक्स केवल शराब की अल्कोहल स्ट्रेंथ के आधार पर तय होगा। इससे उद्योग में अधिक पारदर्शिता आने और नियमों के वैश्विक मानकों के अनुरूप होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Scotch Whisky Association Appeals Against England’s New Single Malt Whisky Rules
Kerala Government Plans Strict Action Against Bars Serving Alcohol to People Below 23सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में एक्साइज राजस्व से लगभग 45,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। नई नीति में टैक्सेशन और नियमों के पालन पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जबकि शराब से जुड़े स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों को स्वास्थ्य विभाग संभालेगा।
बीयर होगी सस्ती
भारत में आम तौर पर बीयर में अल्कोहल की मात्रा 4 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक होती है, जबकि स्ट्रॉन्ग बीयर में यह 8 प्रतिशत तक होती है। व्हिस्की में आमतौर पर 36 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अल्कोहल होता है।
AIB प्रणाली के तहत अधिक अल्कोहल वाली शराब पर ज्यादा टैक्स लगाया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को कम अल्कोहल वाले विकल्पों की ओर प्रोत्साहन मिल सकता है।
कर्नाटक में आबकारी विभाग का ₹45,000 करोड़ राजस्व लक्ष्य
यह बदलाव कर्नाटक की शराब नीति में वर्षों में हुए सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है। राज्य में वर्तमान में एक नियंत्रित मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू है, जहां निर्माता कारखाने से प्राप्त कीमतों की घोषणा करते हैं और सरकार अंतिम खुदरा मूल्य निर्धारित करती है।
सिद्धारमैया ने कहा कि बाजार में धीरे-धीरे समायोजन सुनिश्चित करने के लिए नए उत्पाद शुल्क ढांचे को अगले 3 से 4 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
शराब पर कर राज्य के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है। सरकार ने बजट में 2026-27 के लिए ₹45,000 करोड़ रुपये के उत्पाद शुल्क राजस्व का लक्ष्य रखा है।

