पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम और फरीदाबाद में आधी रात के बाद भी शराब की बिक्री की अनुमति देने पर आबकारी नीति पर सवाल किया है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा कि आबकारी नीति को तैयार करते समय सामाजिक व्यवहार और सामाजिक पतन पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर लोगों को बार और पब में पूरी रात रहने की अनुमति दी जाती है, तो भारतीय समाज का सामाजिक ताना-बाना गंभीर रूप से बाधित होता है। भारतीय समाज में अत्यधिक शराब पीना और नाइट लाइफ में लिप्त होना अभी भी एक सामाजिक वर्जना है।
न्यायालय ने कहा कि यह नाइट क्लबों को हतोत्साहित करने के लिए नहीं समझा जाना चाहिए लेकिन नीति निर्माताओं को भारतीय संस्कृति को ध्यान में रखना जरूरी है। खंडपीठ ने कहा कि कुछ राज्यों ने पूर्ण शराबबंदी लागू की है और अधिकांश राज्यों ने शराब की बिक्री के लिए समय सीमा निर्धारित की है। एक बार समय निर्धारित हो जाने के बाद अतिरिक्त राशि लेकर उक्त समय को पूरी रात के लिए बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए। राज्य की संस्कृति और राजस्व के बीच एक संतुलन बनाया जाना चाहिए। यह उम्मीद की जाती है कि राज्य भविष्य की आबकारी नीति तैयार करते समय न्यायालय की उपरोक्त टिप्पणियों को ध्यान में रखेगा। अदालत पंचकूला जिले के लाइसेंस धारकों द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हरियाणा आबकारी नीति 2024-25 के एक प्रावधान को चुनौती दी गई है, जो गुरुग्राम और फरीदाबाद के अलावा अन्य जिलों में बार और पब को आधी रात के बाद संचालित करने से रोकता है।
वर्तमान मामले में, न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता पंचकूला में अपने पब और बार में शराब की बिक्री का व्यवसाय कर रहे हैं, गुरुग्राम और फरीदाबाद में स्थित व्यक्तियों को समान रूप से स्थित नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस शुल्क की राशि जो उन्हें भुगतान करनी है, वह पंचकूला में लाइसेंस धारक द्वारा भुगतान की जा रही राशि से अलग है। पंचकूला और फरीदाबाद के लिए लाइसेंस फीस 12 लाख रुपये, गुरुग्राम के लिए लाइसेंस फीस 15 लाख रुपये है, जबकि अन्य शेष जिलों के लिए लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये है।’
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Telangana High Court Stays Special Privilege Fee on Bars and Restaurants for Four Weeks
