ऑल इंडिया ब्रुअर्स एसोसिएशन (एआईबीए) ने उत्तर प्रदेश की वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति और तीन वर्षीय निर्यात आबकारी नीति का स्वागत किया है। उन्होंने इसे उद्योग के लिए प्रगतिशील और संतुलित कदम बताया है। एआईबीए के कंसल्टेंट गोपाल जोशी का कहना है कि यह नीति राज्य के सुधारोन्मुखी दृष्टिकोण को मजबूत करती है। यह नीति स्थिर और पारदर्शी कारोबारी माहौल तैयार करने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि इससे न केवल मौजूदा कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि नए निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश आकर्षण का केंद्र बनेगा।
आबकारी नीति के तहत बीयर को लो-अल्कोहलिक बेवरेज मानते हुए उस पर टैक्स नहीं बढ़ाया गया है, जिससे उद्योग को स्थिरता मिलेगी और रिस्पॉन्सिबल ड्रिंकिंग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने संभावना जताई कि कैन, ग्लास, माल्टिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सब्सिडियरी इंडस्ट्री में ५ हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो सकता है, जिससे रोजगार और सप्लाई चेन दोनों मजबूत होंगे।
नई नीति में शुल्क स्थिरता, लाइसेंस प्रक्रिया में सरलता और निर्यात प्रोत्साहन से कारोबार करना आसान होगा। प्रदेश की आबकारी नीति से देश में ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। एआईबीए का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Telangana High Court Stays Special Privilege Fee on Bars and Restaurants for Four Weeks
Social Media Influences Bar Visits and Drink Choices in India, NielsenIQ Report Finds
