उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में 16 दिसम्बर को विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने 24 शराब कंपनियों के प्रतिनिधियों, सात प्लेसमेंट एजेंसियों के संचालकों व विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मंत्री ने सभी प्लेसमेंट एजेंसियों को हिदायत दी है कि जल्द ही बकाया भुगतान नहीं हुआ तो संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी को काली सूची में डाला जाएगा और उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी जिला मुख्यालय में एक-दो ऐसी दुकानें होंगी, जिन्हें मॉडल दुकान बनाया जाएगा। अमूमन शराब दुकानों में हर तरह के लोगों की भीड़ रहती है, जिससे कुछ संभ्रांत परिवार के लोग जाने से हिचकते हैं। मॉडल दुकान होने से वहां अच्छे वर्ग के लोगों को भी बेहतर शराब मिल सकेगी। शराब दुकानों को भी बेहतर साफ-सुथरी व बेहतर डिस्प्ले के साथ संचालित करने का निर्देश दिया गया है। अभी अधिकतर दुकानें गोदाम की तरह दिखती हैं, जो सही नहीं है। मंत्री ने बैठक के बाद उत्पाद प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया। यहां तकनीशियन की संख्या बढ़ाई जाएगी। अवैध शराब की बरामदगी मामले में शराब की भी जांच कराई जाएगी। नकली या गुणवत्ता पर खरा नहीं उतरने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने 1700 करोड़ का लक्ष्य हासिल किया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अभी 1000 करोड़ का लक्ष्य हासिल करना शेष है। उन्होंने राज्य में भी शराब निर्माण की दिशा में पहल करने को कहा और यह भी कहा कि यहां भी ऐसी कंपनियां बनें, जिससे शराब का निर्यात हो। इससे लोगों को नौकरियां भी मिलेंगी।
शराब आपूर्तिकर्ता का भी रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। इससे राजस्व भी बढ़ेगा। कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोरोना काल में शराब की बिक्री पर 25 प्रतिशत वैट अलग से लगा था जो अब तक जारी है। इससे शराब की कीमतें अधिक हैं। इसे खत्म किया जाए।
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मंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में मुख्यालय स्तर पर एक हाई लेवल टीम बनाई है। इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। इनके पास एमआरपी से अधिक, ब्रांडेड शराब की उपलब्धता नहीं होना, नकली शराब की आपूर्ति, अवैध शराब की आपूर्ति सहित कोई भी शिकायत की जा सकती है।

