देशी शराब केवल टेट्रा बोतलों में ही बेची जा सकेगी। पहले इसे पेट और कांच की बोतलों में भी बेचा जा सकता था। इससे मिलावट और अवैध शराब आपूर्ति की संभावना कम हो जाएगी। नोएडा, गाजियाबाद, आगरा और लखनऊ में कम अल्कोहल वाले बार (केवल बीयर और वाइन परोसने वाले) शुरू किए गए है। नोएडा, गाजियाबाद, आगरा और लखनऊ में कम अल्कोहल वाले प्रीमियम खुदरा विक्रेता (पीआरवी) (केवल बीयर और वाइन बेचने वाले) शुरू किए गए। नोएडा और नगर निगम क्षेत्रों में न्यूनतम 3,000 वर्ग फीट क्षेत्रफल वाली 2 मॉडल शॉप प्रीमियम मॉडल शॉप के रूप में कार्य कर सकती हैं।
दुकानों पर पीओएस मशीन और डिजिटल भुगतान अनिवार्य
प्रत्येक खुदरा दुकान में पीओएस मशीन, 2 सीसीटीवी कैमरे और ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की वैकल्पिक सुविधा प्रदान करना अनिवार्य किया गया। विकास प्राधिकरणों और औद्योगिक क्षेत्रों में 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले आईटी और आईटीईएस प्रतिष्ठानों में बार और पीआरवी खोले जा सकेंगे।
Scotch Whisky Association Appeals Against England’s New Single Malt Whisky Rules
Kerala Government Plans Strict Action Against Bars Serving Alcohol to People Below 23इवेंट बार लाइसेंस को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा
वाइनरी, ब्रुअरीज और डिस्टिलरी में आगंतुकों के लिए शराब चखने की अनुमति है। वाइन बनाने वाली कंपनियों और वाइनरी में खुदरा दुकानें खोली जा सकेंगी। आईएमएफएल की नियमित श्रेणी में 90 एमएल श्रेणी शुरू की गई और दुरुपयोग को रोकने के लिए इवेंट बार लाइसेंस को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया। वाइन और एलएबी को बीयर की तरह डिब्बों में बेचा जा सकता है। शराब की विभिन्न श्रेणियों के लिए एमआरपी और उत्पाद शुल्क की गणना के लिए नया फॉर्मूला पेश किया गया। निवेश और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किए गए उपाय अनाज ईएनए निर्यात शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2 रुपये प्रति लीटर किया गया। बीयर और विदेशी शराब के लिएपिछले वर्ष शुरू की गई फ्रेंचाइज़ फीस को कम किया गया और युक्तिसंगत बनाया गया, विशेष रूप से निर्यात के लिए। राज्य में स्थित डिस्टिलरी और ब्रुअरीज के लिए बीयर और विदेशी शराब के निर्यात शुल्क में कमी की गई। ब्रांड पंजीकरण और लेबल अनुमोदन शुल्क को युक्तिसंगत बनाया गया और कम किया गया, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निर्मित वाइन और बीयर के लिए। देश से बाहर निर्यात किए जाने वाले ब्रांडों के लिए लेबल अनुमोदन की शर्तों को सरल बनाया गया और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया गया।

