अल्कोहल, शराब, मदिरा या मादक पेय पदार्थ ये कुछ ऐसे नाम हैं जिनसे हम अल्कोहल को पुकारते हैं। सबसे आम नाम है शराब। भारत में अक्सर शराब का सेवन बुरा ही माना जाता है। किसी परिवार में अगर कोई शराब पीता है, तो ज्यादातर लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं। कई बार शराब के नशे में ऐसी बहुत सी अप्रिय घटनाएं होती हैं, जो नहीं होनी चाहिए थी। कुछ लोग दावा करते हैं कि वे शराब के नशे में बोली हुई बातें भूल जाते हैं। शराब दिमाग और शरीर पर किस तरह असर करती है।
शराब कैसे बनती है?
पेय पदार्थों में मौजूद अल्कोहल को इथेनॉल या एथिल अल्कोहल कहा जाता है। यह अनाज, फलों और सब्जियों में मौजूद शर्करा के खमीर से तैयार होता है। जैसे अंगूर में मौजूद शुगर से तैयार शराब को वाइन कहा जाता है, वहीं आलू में मौजूद शुगर से वोदका तैयार की जाती है।
शराब की लत क्यों लग जाती है?
अब अगर शराब इतनी ही खराब है, तो हम इसे पीते क्यों हैं। आखिर हमें शराब की लत क्यों लग जाती है। असल में शराब डोपामाइन को सक्रिय करती है। डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है, जो आनंद, प्रेरणा और सीखने में भूमिका निभाता है। ये मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करता है। यानी यह आपको खुश, हल्का और मोटिवेटिड महसूस कराता है।
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Telangana High Court Stays Special Privilege Fee on Bars and Restaurants for Four Weeksजब इसका असर खत्म होता है, तो इंसान को तनाव और एंगजायटी महसूस होने लगती है। जिससे बचने के लिए वह फिर से शराब पीना चाहता है, क्योंकि वह स्थिति उसे सहज और अच्छा महसूस कराती है। खासकर जब लोग अपनी इच्छाओं को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं, तो इससे शराब की लत लग सकती है क्योंकि यह उन्हें भावनात्मक और शारीरिक रूप से प्रभावित करती है। यही वजह है कि इंसान बार बार शराब पीना चाहता है।
शराब पीने के बाद लोग बातें क्यों भूल जाते हैं?
अक्सर आपने देखा होगा कि शराब पीने के बाद लोग खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाते। उन्हें कुछ पता ही नहीं होता कि वो कहां है और उनके साथ क्या हो रहा है। शराब पीकर होश खोना यानी ब्लैकआउट होने का मतलब है आप एक खास समय में अपनी याददाश्त इकट्ठा नहीं कर पाते। ब्लैकआउट किसी व्यक्ति की याददाश्त में उन घटनाओं के अंतराल होते हैं जो नशे में होने के दौरान हुई थीं।
दिमाग पर किस तरह असर करता है अल्कोहल
शराब ब्रेन के बैलेंस, मेमोरी, स्पीच और डिसीजन मेकिंग को कंट्रोल करने वाले क्षेत्रों के लिए अपना काम करना कठिन बना देती है, जिसकी वजह से चोट लगने और अन्य नकारात्मक परिणामों की संभावना बढ़ जाती है। लंबे समय तक भारी मात्रा में शराब पीने से न्यूरॉन्स में बदलाव होता है, जैसे कि उनके आकार में कमी आना।
क्या कहती है रिसर्च
हाइडेलबर्ग यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में इस बारे में बताया गया है। शराब में मौजूद एथेनॉल, अल्कोहल का छोटा अणु है। चूंकि इंसानी शरीर में 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा पानी है, एथेनॉल खून और पानी में घुल कर आसानी से दिमाग तक पहुंच जाता है। दिमाग पर अल्कोहल के असर की वजह से सेंट्रल नर्वस सिस्टम प्रभावित होती है, जिसकी वजह से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में शख्स ब्लैकआउट का शिकार हो जाता है। यानी वह शराब के असर के दौरान हुई बातें भूल जाता है।
शराब का असर शरीर में कितने समय तक रहता है?
एल्कोहोल पेट और छोटी आंत के जरिए खून में अवशोषित होते हैं। यही नहीं एल्कोहोल से किडनी, मूत्राशय, लिवर, फेफड़े और त्वचा प्रभावित होती है। अगर आपने रात में शराब का सेवन किया है, तो यह आपके शरीर में एक से तीन घंटे तक रहती है, लेकिन मूत्र परीक्षण और श्वासनली में 24 घंटे तक शराब के उपयोग का पता लगाया जा सकता है। बाल परीक्षण से यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपने पिछले 90 दिनों में शराब पी है या नहीं।
ज्यादा शराब पीने से होने वाले नुकसान
ज्यादा शराब पीने से शरीर से विटामिन और खनिज खत्म हो सकते हैं, जिससे हैंगओवर हो सकता है। अल्कोहल के सेवन से मतली और उल्टी महसूस हो सकती है। यह निर्जलीकरण का कारण भी बन सकती है।
जैसे ही आप शराब पीते हैं आपके लिवर का काम बढ़ जाता है। वह शराब को ब्रेक करने में अपनी ताकत लगाता है। हालांकि यह गुर्दे, मूत्र, त्वचा और फेफड़ों से भी होकर गुज़रता है। अल्कोहल आपके शरीर को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। यहां हैं कुछ ऐसी समस्याएं जो अल्कोहल के ज्यादा या नियमित सेवन से हो सकती हैं।
क्या अल्कोहल छोड़ देना चाहिए
अल्कोहल के गंभीर खतरों से बचने के लिए मात्रा को सीमित रखना जरूरी है। एक्सपर्ट मानते हैं कि पुरुषों के लिए प्रति दिन एक या दो ड्रिंक और महिलाओं के लिए प्रति दिन एक ड्रिंक सुरक्षित मात्रा है। एक ड्रिंक का मतलब है तकरीबन 17 मिली लीटर शुद्ध अल्कोहोल। यह अल्कोहल के प्रकार के अनुसार बदल सकती है। अगर बियर है, तो एक ड्रिंक का मतलब एक बॉटल होगा, इसी तरह अन्य प्रकार के अल्कोहल में उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के अनुसार एक ड्रिंक की मात्रा तय होगी। -अनिता शर्मा
कैसे करें सेफ ड्रिंकिंग
ड्रिंक्स के बीच दूरी जरूरी है, एक सप्ताह में चार दिन एक- एक ड्रिंक लेना सेफ है, लेकिन एक बार में ही चार ड्रिंक लेना खतरनाक हो सकता है। ड्रिंक के साथ अच्छी तरह से खाना भी जरूरी है। अल्कोहल के पहले एक बड़ा गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इससे डिहाइड्रेशन से बचाव होगा। आराम के लिए ड्रिंक्स सबसे अच्छा उपाय नहीं हैं उसके लिए सोना सबसे अच्छा साबित होगा।
अल्कोहोल की आदत छोड़ने के टिप्स
इस सफर में अगर कोई चीज सबसे ज्यादा जरूरी है तो वह है आपकी विल पावर। कई बार शरीर से ज्यादा अल्कोहल आपका मन मांगता है। उसे रोकें।

