पिछले साल दुनियाभर के वाइन उत्पादन में १० फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। यह पिछले छह दशक में सबसे बड़ी गिरावट है। २०२३ में वाइन का उत्पादन १० फीसदी गिर गया। वाइन उत्पादकों की वैश्विक संस्था के मुताबिक चरम मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण ६० साल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लगभग ५० वाइन उत्पादक देशों के उद्योगपतियों के संगठन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ वाइन एंड वाइन (ओआईवी) ने २५ अप्रैल को कहा, ‘चरम मौसमी परिस्थितियों, जैसे सूखा, आग और जलवायु से जुड़ी अन्य समस्याओं को ही इस भारी गिरावट के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है। वाइन उत्पादन में सबसे ज्यादा गिरावट ऑस्ट्रेलिया और इटली में हुई। ऑस्ट्रेलिया में २०२३ में २६ फीसदी कम वाइन बनी जबकि इटली में २३ फीसदी। स्पेन को भी लगभग २० फीसदी की गिरावट झेलनी पड़ी। चिली और दक्षिण अप्रâीका में दस फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई। ओआईवी का कहना है कि १९६१ के बाद अंगूर का उत्पादन २०२३ में सबसे कम हुआ है। बल्कि पिछले साल नवंबर में जो अनुमान जाहिर किया गया था, उत्पादन उससे भी कम हुआ। वाइन उत्पादकों की मुश्किलें कम उपभोग ने भी बढ़ाई हैं। ओआईवी के मुताबिक २०२३ में लोगों ने तीन फीसदी कम वाइन खरीदी।
जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार
संगठन के निदेशक जॉन बार्कर ने कहाकि ‘उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के वाइन उत्पादक क्षेत्रों में सूखा, अत्यधिक गर्मी, जंगल की आग, भारी बारिश के कारण बाढ़ और फंगस के कारण होने वाली बीमारियों’ ने वाइन उत्पादन को प्रभावित किया है। हालांकि बार्कर ने माना कि वाइन के में इतनी भारी गिरावट के लिए सिर्फ जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता लेकिन उन्होंने इसे सबसे बड़ी चुनौती बताया। बार्कर ने कहा, ‘हमें पता है कि अंगूर की बेल एक लंबे समय तक जीवित रहने वाला पौधा है जो संवेदनशील इलाकों में उगाया जाता है और जलवायु परिवर्तन का इस पर बहुत ज्यादा असर हो रहा है। जबकि पूरी दुनिया में वाइन के उत्पादन में गिरावट हुई है, प्रâांस एक ऐसा देश रहा जहां वाइन का उत्पादन बढ़ा। वहां २०२३ में २०२२ के मुकाबले चार फीसदी ज्यादा वाइन उत्पादन हुआ और वह सबसे ज्यादा वाइन उत्पादन करने वाला देश रहा।
उपभोग भी घटा
वाइन के उपभोग पर भी २०२३ में बड़ा असर देखने को मिला। १९९६ के बाद से यह सबसे निचले स्तर पर रहा। इसकी एक बड़ी वजह महंगाई को माना जा रहा है। खासतौर पर चीन में वाइन के उपभोग में भारी गिरावट देखी गई, जो वहां की धीमी अर्थव्यवस्था की वजह से था। पुर्तगाल, प्रâांस और इटली सबसे ज्यादा वाइन पीने वाले देश रहे। बार्कर कहते हैं कि उपभोग में आ रही कमी के लिए ‘जनसांख्यिकी और जीवनशैली में बदलाव’ भी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर मांग का माहौल जितना जटिल है, उससे यह कहना मुश्किल है कि गिरावट जारी रहेगी या नहीं। यह बात स्पष्ट तौर पर कही जा सकती है कि २०२३ में महंगाई मांग को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारण था। अंगूर उत्पादन के मामले में भारत पहली बार पहले दस देशों में शामिल हुआ है। उसके यहां अंगूर की खेती का कुल क्षेत्र तीन फीसदी बढ़ा। वीके/एए (एएफपी)
ग्लेनवॉक व्हिस्की ने की रिकॉर्ड तोड़ कमाई
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के कई कलाकार शराब का व्यवसाय चला रहे हैं। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक के कई सेलेब्रेटी शराब के व्यापर से अच्छी कमाई कर रहे हैं। पिछले वर्ष जून में व्हिस्की का कारोबार शुरु करने वाले संजय दत्त की कंपनी ने रेकॉर्डतोड़ कमाई की है। उन्होंने अपना खुद का स्कॉच व्हिस्की ब्रांड द ग्लेनवॉक लॉन्च किया था। यह ब्रांड कार्टेल एंड ब्रदर्स द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसमें एक्टर ने इस बिजनेस के लिए बड़ी रकम को निवेश किया था। यह कंपनी लिविंग लिक्विड, ड्रिंक बार एकेडमी और मॉर्गन बेवरेजेज के साथ साझेदारी में चलती है। एक साल से भी कम समय में द ग्लेनवॉक ने कमाल कर दिया। व्हिस्की की सही कीमत ने लोगों को आकर्षित किया, जिसकी वजह से द ग्लेनवॉक ने रिकॉर्डतोड़ कमाई की।
ग्लेनवॉक की १२०,००० बोतलें केवल चार महीने में ही बिक गई। मीडिया रिर्पोर्ट के मुताबिक
महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे और पुणे में ही केवल इसकंपनी ने तीन महीने के भीतर बाजार की १८ प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। चार महीने में करीब १९.२० करोड़ रुपये की कमाई हुई है। द ग्लेनवॉक का लक्ष्य अगले वित्तीय वर्ष में २.८ मिलियन बोतलें बेचने का है। लिविंग के संस्थापक मोक्ष सानी ने कहा ग्लेनवॉक की भारतीय बाजार में तेजी से बढ़ती प्रीमियम के साथ किफायती स्कॉच व्हिस्की है, जिससे उसके आगे सफल होने की संभावना है। हम बाजार में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, जिसके लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसके साथ उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में ग्लेनवॉक का विस्तार हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना सहित कई और राज्यों में किया जाएगा। ग्लेनवॉक की एक बोतल की कीमत १,५५० रुपये से १,६०० रुपये है। संजय दत्त ने अल्कोबेव स्टार्टअप, कार्टेल एंड ब्रोज में निवेश करने से पहले पहले भी कई निवेश किए हैं।
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