उद्योग के लिए प्रगतिशील और संतुलित नीति
एआईबीए के कंसल्टेंट एवं सलाहकार गोपाल जोशी ने कहा कि भारतीय बीयर उद्योग के नजरिए से ये नीतियां प्रगतिशील, संतुलित और बेहद उत्साहजनक हैं। इससे न केवल मौजूदा कंपनियों को लाभ होगा, बल्कि नए ब्रुअर्स के लिए भी राज्य एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनेगा और ब्रूइंग व संबंधित विनिर्माण क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।
पूरे ब्रूइंग इकोसिस्टम को मिलेगा लाभ
उन्होंने बताया कि इन नीतियों का असर सिर्फ ब्रुअर्स तक सीमित नहीं रहेगा। कैन, ग्लास बोतल, संभावित माल्टिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक उद्योगों सहित पूरे ब्रूइंग इकोसिस्टम के विकास की संभावना है। अनुमान है कि इन क्षेत्रों में ₹5,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। यदि यह मॉडल पूरी तरह लागू होता है, तो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, मजबूत सप्लाई चेन और औद्योगिक क्षमता में वृद्धि देखने को मिलेगी।
बीयर को कम अल्कोहल पेय मानने का असर
नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें बीयर को कम अल्कोहल वाले पेय के रूप में स्पष्ट मान्यता दी गई है। इसी आधार पर सरकार ने बीयर पर टैक्स नहीं बढ़ाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि आबकारी नीति केवल राजस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखती है।
यह दृष्टिकोण जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा देने के साथ उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को स्थिर और पूर्वानुमेय वातावरण प्रदान करता है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा
गोपाल जोशी ने यह भी सराहा कि नीति में व्यापार सुगमता बढ़ाने वाले कई कदम शामिल हैं, जैसे विचार शुल्क और आयात शुल्क में स्थिरता बनाए रखना। इससे कीमतों में अनुमानित स्थिरता रहती है, उपभोक्ताओं के लिए एमआरपी संतुलित रहता है और उद्योग के लिए व्यवसाय-अनुकूल माहौल बनता है। ऐसी निरंतरता उद्योग के विश्वास को मजबूत करती है और अंतरराज्यीय व्यापार को प्रोत्साहित करती है।
माइक्रोब्रुअरी सेक्टर को मिलेगा प्रोत्साहन
नीति में राज्य के उभरते माइक्रोब्रुअरी सेगमेंट को भी मान्यता दी गई है। विचार शुल्क स्थिर रखने से छोटे उद्यमियों को विस्तार का अवसर मिलेगा और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर ताज़ी बीयर उपलब्ध होती रहेगी। इससे स्थानीय पर्यटन, आतिथ्य और अनुभवात्मक पेय संस्कृति को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकता है यूपी
ऑल-इंडिया ब्रूअर्स एसोसिएशन (एआईबीए), जो भारत की सबसे पुरानी संस्था है और देश की प्रमुख ब्रुअरीज तथा संबंधित उद्योग हितधारकों का प्रतिनिधित्व करती है, ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए घोषित उत्तर प्रदेश आबकारी नीति और तीन वर्षीय निर्यात आबकारी नीति का स्वागत किया है।
संस्था के अनुसार ये कदम राज्य की सुधार-उन्मुख नीति दिशा को मजबूत करते हैं और स्थिर, पारदर्शी तथा सामाजिक-आर्थिक संतुलन वाले नीति वातावरण की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
निर्यात को बढ़ाने वाले प्रावधान
बीयर निर्यात से जुड़े प्रावधानों को भी उद्योग ने सकारात्मक बताया है। बॉटलिंग शुल्क, फ्रेंचाइज़ी शुल्क और विशेष विचार शुल्क में कमी से ब्रुअरीज अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमत बनाए रख सकेंगी। इससे भारत की पहचान एक गुणवत्ता वाली बीयर के उभरते निर्यातक देश के रूप में मजबूत हो सकती है।
लाइसेंस और शुल्क में राहत
नीति घरेलू बीयर के ब्रांड और लेबल पंजीकरण शुल्क को स्थिर रखती है, जिससे अनुपालन लागत का अनुमान लगाना आसान होता है। साथ ही, FL-2 लाइसेंसधारकों के वार्षिक लाइसेंस शुल्क को यथावत रखते हुए सुरक्षा जमा राशि कम की गई है, जिससे वित्तीय दबाव घटेगा और उद्योग को राहत मिलेगी।
लेबल पंजीकरण शुल्क में बड़ी कटौती
नीति का एक उल्लेखनीय कदम यह है कि उत्तर प्रदेश के बाहर निर्यात के लिए बीयर के लेबल पंजीकरण शुल्क को ₹6 लाख से घटाकर ₹0.25 लाख कर दिया गया है। इसे निर्यात-उन्मुख ब्रुअर्स के लिए बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है और यह बाहरी व्यापार को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है।










