प्रदेश में संचालित तथा पूर्व में संचालित विभिन्न आबकारी अनुज्ञापनों में संचित मदिरा और बीयर के विनष्टीकरण (डिस्ट्रक्शन) एवं पुनरआसवन (रिडिस्टिलेशन) से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल और विकेंद्रीकृत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भविष्य में ऐसे सभी मामलों की अनुमति संबंधित जोन के संयुक्त आबकारी आयुक्त के स्तर से प्रदान की जाएगी।
किन अनुज्ञापनों पर लागू होगा आदेश
यह निर्णय निम्नलिखित अनुज्ञापनों में संचित मदिरा पर लागू होगा:
- सीएलबी–1
- सीएलबी–2
- एफएल–3
- एफएल–39
- एफएल–1
- एफएल–1A
- एफएल–2
- एफएल–2B
- बीआईओ–1
- बीआईओ–19
- समस्त प्रकार के बांड अनुज्ञापन
इन अनुज्ञापनों में संचित ड्यूटी पेड एवं नॉन-ड्यूटी पेड भारत निर्मित विदेशी मदिरा (IMFL), देशी मदिरा, बीयर, वाइन तथा लो-अल्कोहलिक बेवरेज (LAB) से संबंधित मामलों पर यह आदेश लागू होगा।
कार्रवाई आबकारी नीति के प्रावधानों के अनुसार
आदेश के अनुसार, आबकारी नीति के अंतर्गत आने वाले विनष्टीकरण मामलों में नीति के प्रावधानों के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही प्रत्येक मामले में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राजस्व को किसी प्रकार की क्षति न हो।
पुनरआसवन की अनुमति देते समय आवश्यक एवं औचित्यपूर्ण शर्तों और प्रतिबंधों का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा।
समिति की निगरानी में होगी प्रक्रिया
विनष्टीकरण की प्रक्रिया संबंधित उप आबकारी आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति की निगरानी में की जाएगी। इस समिति में निम्न सदस्य शामिल होंगे:
- जिलाधिकारी द्वारा नामित उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM)
- जिला आबकारी अधिकारी
तकनीकी और सुरक्षा व्यवस्था
- विनष्टीकरण से पहले स्टॉक पर लगे बार-कोड और क्यूआर कोड की एक्सेल शीट तैयार की जाएगी।
- इसे टास्क फोर्स अनुभाग को भेजा जाएगा, ताकि संबंधित स्टॉक को पोर्टल से हटाया जा सके।
- पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।
- यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रक्रिया से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
अंत में आदेश में सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

Chief Editor- Aabkari Times
