अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त सीमा शुल्क (टैरिफ) और चीन के एंटी-डंपिंग शुल्क के कारण फ्रांसीसी वाइन और स्पिरिट का निर्यात पिछले साल कम से कम 25 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर गिर गया है। वाइन और स्पिरिट विक्रेताओं के समूह FEVS के अनुसार, 2025 में कुल निर्यात 16 करोड़ 80 लाख केस तक सीमित रहा। निर्यात का यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 3 प्रतिशत कम है। इसे इस सदी की शुरुआत से अब तक का सबसे कमजोर निर्यात बताया गया है।
मूल्य के हिसाब से निर्यात 8 प्रतिशत घटकर 14 अरब 30 करोड़ यूरो तक सीमित हो गया है। यह 5 वर्षों में सबसे कम है। इस गिरावट के साथ, वाइन और स्पिरिट फ्रांस के दूसरे सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र से खिसककर तीसरे स्थान पर आ गया है। निर्यात क्षेत्र के मामले में फिलहाल एयरोस्पेस और कॉस्मेटिक्स आगे हैं। FEVS के अध्यक्ष गैब्रियल पिकार्ड ने चेतावनी दी है कि 2026 भी चुनौतीपूर्ण रहेगा।
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और अन्य 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी के कारण समीक्षा अवधि में अमेरिकी मांग धीमी हो गई है। 2025 में अमेरिका में फ्रांसीसी वाइन और स्पिरिट की बिक्री 21 प्रतिशत घटकर 3 अरब यूरो रह गई है। पिकार्ड ने संकेत दिया है कि 2026 में बिक्री में और कमी आ सकती है।
चीन में भी बिक्री 20 प्रतिशत घटकर 76 करोड़ 70 लाख यूरो तक सीमित हो गई है। विशेष रूप से कोन्याक और आर्मेनियाक जैसे वाइन-आधारित स्पिरिट पर कड़े एंटी-डंपिंग शुल्क का बड़ा असर पड़ा है।

Chief Editor- Aabkari Times








