- नई आबकारी नीति लागू होने के बाद शराब की कीमतों में औसतन 20% तक बढ़ोतरी हुई है।
- अब शराब दुकानों का आवंटन ई-टेंडर के माध्यम से किया जाएगा, जिससे शराब ठेकेदारों की मोनोपॉली खत्म होगी।
- रिन्यू पॉलिसी की जगह टेंडर प्रक्रिया से नीलामी होगी।
- शराब तस्करी रोकने के लिए QR कोड लागू होगा।
- नए वित्तीय वर्ष में ₹18,000 करोड़ से अधिक का राजस्व लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग ₹3,000 करोड़ ज्यादा है।
शराब दुकानों के नियम
- नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर की दूरी तक शराब दुकानों पर प्रतिबंध यथावत रहेगा।
- पवित्र नगरों में भी शराब दुकानों पर रोक जारी रहेगी।
- वर्ष 2026–27 में कोई नई दुकान नहीं खोली जाएगी और दुकानों के अहाते बंद रहेंगे।
- दुकानों के नवीनीकरण का विकल्प समाप्त कर दिया गया है।
- प्रदेश की सभी 3,553 मदिरा दुकानों का निष्पादन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के माध्यम से होगा।
- आरक्षित मूल्य में 20% वृद्धि की जाएगी।
- अधिकतम पांच दुकानों का एक समूह बनाकर ई-टेंडर किया जाएगा।
अन्य महत्वपूर्ण बातें
- शराब टैक्स दरें, निर्माण इकाई और बार लाइसेंस फीस यथावत रहेंगी।
- शराब बनाने वाली कंपनियों को अब अपने उत्पादों की कीमत अनुमोदित कराने की जरूरत नहीं है; वे पोर्टल पर सीधे कीमत घोषित कर सकेंगे।
- निर्यात प्रोत्साहन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए विनिर्माताओं को अपने उत्पाद की कीमत स्वयं पोर्टल पर घोषित करने की सुविधा दी गई है।
- लेबल पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
- प्रदेश के जनजातीय स्व-सहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराया जाएगा।
विदेशी मदिरा की बॉटलिंग फीस बढ़ा दी गई है:
- स्पिरिट: ₹6 से बढ़ाकर ₹12/प्रूफ लीटर
- बीयर: ₹3 से बढ़ाकर ₹6/बल्क लीटर
- ब्रांड की कीमत बढ़ाने के लिए अब आवेदन आबकारी आयुक्त के पास नहीं भेजना होगा, बल्कि डिस्टिलरी पोर्टल पर अपलोड करना होगा। सिस्टम अन्य राज्यों की दरों से मिलान करेगा और शर्तें पूरी होने पर ऑटो अप्रूवल मिलेगा।
- दूसरे राज्यों की हेरिटेज मदिरा प्रदेश में शुल्क मुक्त रहेगी।
- शराब ठेकों में अब केवल ई-बैंक गारंटी ही मान्य होगी।
- देश के बाहर शराब के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट फीस में संशोधन और लेबल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को शिथिल किया गया है।

Chief Editor- Aabkari Times








