राज्य में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए कंपनियां नये- नये प्रस्ताव दे रही हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत सरकार द्वारा कंपनियों को आसानी से उत्पादन इकाई लगाने के लिए लाइसेंस प्राप्त हो जा रहे हैं। लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कुछ कंपनियां अपने लाइसेंस मामूली जुर्माने में एक्सटेंड कराती जाती हैं और जमीन पर कोई काम नहीं होता है। ऐसी कंपनियों को ध्यान में रखते हुए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। आबकारी राज्य मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि शराब अथवा बीयर की नई इकाई स्थापित करने के लिए अधिकतम दो वर्ष का समय निर्धारित किया जाता है। इस दौरान यदि कंपनी अपने कुल निवेश धनराशि का प्लांट और मशीनरी में 50 प्रतिशत व्यय करने के पश्चात निर्माण हेतु लाइसेंस अवधि बढ़वाना चाहती है तो ही उसे एक वर्ष का और समय दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीयर के लिए बी-20 (निर्माण हेतु लाइसेंस) के लिए अब एक वर्ष विस्तार कराने पर 2.50 लाख रुपये शुल्क देना होगा। आसवनी स्थापना हेतु पीडी-33 लाइसेंस की दो वर्ष के पश्चात पुनः लाइसेंस विस्तार हेतु 5 लाख रुपये शुल्क देना होगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में आबकारी से जुड़े उद्यमियों के लिए कई नीतियों में बदलाव को मंजूरी दी गई है।
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आबकारी नीति में हुआ बदलाव, नई डिस्टिलरी लगाने में मिली 3 वर्ष की छूट
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